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हुआ गरीबी में आटा गीला।

                
                                                         
                            शहर में आए नाम कमाने
                                                                 
                            
शहर में आए दाम कमाने
शहर में मुझे कोई नहीं पहचाने
गांव छोड़कर गांव में भी हुए हम अनजाने
शहर में न काम मिला
शहर में न दाम मिला
शहर में न नाम मिला
गांव में मन था खिला-खिला
आकर शहर में क्या मिला?
हुआ गरीबी में आटा गीला।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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22 घंटे पहले

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