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सांस्कृतिक नगरी मुजफ्फरपुर

                
                                                         
                            मंद मंद कूल कूल बह रही है हवा
                                                                 
                            
है यह करोड़ों की,अरबों की दवा
पर शहर के चकाचौंध में मिलेगी नहीं यह हवा
आओ भीखनपुर में
आओ मेरे मुजफ्फरपुर में
लीची पुर में
मिलेगी चमत्कारिक हवा
मिलेगी साहित्यिक हवा
इस पावन धरा पर
कहते जिसे मुजफ्फरपुर शहर
है यह स्वर्ग से सुंदर
इसी धरा पर
ताड़ों के पेड़ ढेर सारे
हैं यहां जैसे अंबर में तारे
है सारा संसार सुंदर
है हमारा हिंदुस्तान सुंदर
पर मुजफ्फरपुर है सबसे सुंदर
है बाबा गरीबनाथ की नगरी
है यह सहज कुमार की नगरी
है यह खुदीराम बोस की नगरी
है यह सांस्कृतिक नगरी
है यह आध्यात्मिक नगरी
है यह सांस्कृतिक नगरी
है यह ऐतिहासिक नगरी
हैं यहां पुष्प कचनार के
रखे हैं ईश्वर इसे प्यार से।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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