समय के खेल निराले हैं
जीतते वही जो हिम्मत वाले हैं
समय सबका आता है
इंसान समझ नहीं पाता है
समय से पहले जो चलता है
वह मंजिल पहले पहुंचता है।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X