सज गया सारा शहर
सज गया हमारा गया शहर
आ गया वह प्रहर
जब पिंडदानी आते हैं
गया की शोभा बढ़ाते हैं
विश्व के कोने कोने से
हिंद के कोने कोने से
आते हैं मेहमान
करते हैं पिंडदान
गया की धरती महान
गया की संस्कृति महान
गया की है एक पहचान
रेल से जुड़ा है गयाजी
पवन से जुड़ा है गयाजी
आते गगन से वायुयान
उड़ते गगन में वायुयान
देखो ऊंची उड़ान
भरो ऊंची उड़ान
कह रहे हैं वायु यान
बिहार की शान
है हमारा गया
"कभी गये गया
कि नहीं?"
पूछेंगे बच्चे, पूछेगी मही
तो आप आइये
घूम कर जाइए
कीजिए पिंडदान
पितृ पक्ष मेला लगा है
शहर मेरा सजा है
शंख तर्पण का बजा है
शंख समर्पण का बजा है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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