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अच्छा और अच्छा बनते जाओ।

                
                                                         
                            रोने से नहीं
                                                                 
                            
तपने से ही
पास सफलता आती है
संघर्ष से सफलता आती है
योग्य खुद को बनाओ
सतत प्रयास से सफलता पाओ
सुधार स्वयं में लाओ
अच्छा और अच्छा बनते जाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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