रेल भरल आईल
पहिले से लोगवा बा कोचाईल
बात बईठे के छोड़ ना
खड़ा हो जा
बस इहे बहुत बा
लइका,लइकी,बबुआ,बबुनी
जवान बुढ़ा बुढ़ी
सीट के ढूंढ़ा ढूंढ़ी
हो हल्ला मचल बा
पूरा चहल-पहल बा
कसहूं खड़ा भईनी
तनी सुस्तइनी
इ ह बिहार
कर इहा विहार
मत कर झगड़ा मार
मत कर तकरार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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