तन प्यार
नहीं है प्यार
मन प्यार
है सच्चा प्यार
तन परीवर्तन शील है
हर क्षण परीवर्तन शील है
आत्मा से आत्मा का मिलन होता है
वही सच्चा मिलन होता है
पुरुष प्यार में उर्वशी धरा पर आई
पुरूरवा से मिलने आई
मिल कर क्या पाई?
तन प्यार छुई मुई घास है
तन पा,पुरूष समझता प्यार पास है
पर तन प्यार भरम है
तन प्यार बनाता बेशरम है
बदनामी ही हाथ आती है
तन प्यार करने में लाज आती है
सच्चा प्यार
है स्वदेश प्यार
सच्चा प्यार
है मानव प्यार
सच्चा प्यार
है जन प्यार
सच्चा प्यार
है ईश्वर प्यार
बाकी सब बदनामी है
फिर बड़ी गुमनामी है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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