आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रयागराज शहर

                
                                                         
                            तीन नदियों का संगम जहां
                                                                 
                            
है दृश्य विहंगम जहां
जहां पावन यमुना की धारा है
जहां गंगा का किनारा है
जहां सरस्वती अन्तर्ध्यान है
जहां मिलता सबको ज्ञान है
महादेवी,फिराक की कर्म स्थली
निराला,बच्चन की कर्म स्थली
पंत,धर्मवीर भारती की कर्म स्थली
नया नाम प्रयागराज है
जहां के लोग करते राज हैं
नेहरू, इंदिरा,विश्वनाथ प्रताप जहां से हैं
अमिताभ,नरगिस आदित्य जहां से हैं
जिलाधिकारियों का खान यह शहर है
साहित्य की धारा बहती यहां हर प्रहर है
बड़ा प्यारा, बड़ा न्यारा यह शहर है
मैं गया १९८७ में जहां
आनन्द भवन है जहां
ईंट ईंट करता इसका बखान है
जिसे जानता जहान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर