तीन नदियों का संगम जहां
है दृश्य विहंगम जहां
जहां पावन यमुना की धारा है
जहां गंगा का किनारा है
जहां सरस्वती अन्तर्ध्यान है
जहां मिलता सबको ज्ञान है
महादेवी,फिराक की कर्म स्थली
निराला,बच्चन की कर्म स्थली
पंत,धर्मवीर भारती की कर्म स्थली
नया नाम प्रयागराज है
जहां के लोग करते राज हैं
नेहरू, इंदिरा,विश्वनाथ प्रताप जहां से हैं
अमिताभ,नरगिस आदित्य जहां से हैं
जिलाधिकारियों का खान यह शहर है
साहित्य की धारा बहती यहां हर प्रहर है
बड़ा प्यारा, बड़ा न्यारा यह शहर है
मैं गया १९८७ में जहां
आनन्द भवन है जहां
ईंट ईंट करता इसका बखान है
जिसे जानता जहान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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