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पानी तेरे रूप अनेक

                
                                                         
                            सहज पानी बचाइए,बिन पानी सब सून
                                                                 
                            
यहां रहिए चाहे जाइए रंगून
पीने का पानी
नहाने का पानी
कपड़ा साफ करने का पानी
पानी तेरे रूप अनेक
बन कर नेक
बचाईए पानी
होता जब वर्षा का पानी
होता शहर पानी पानी
आता जब बाढ़ का पानी
बढ़ती सबकी परेशानी
बिजली जाए तो बड़े परेशानी
एक हैंडपंप लगाओ
आपातकाल में राहत पाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

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