ओ मुजफ्फरपुर!
है तू प्यार से भरपूर
है तू मीठास से भरपूर
तू है नहीं दूर
है तू मेरे हृदय में
तुझको ढूंढ़ा मैं नील नीलय में
है तू अभय में
हूं निर्भय मैं
देख तेरी चौड़ी चौड़ी सड़कें
दिल मेरा धड़ धड़ धड़के
उगा था दिनकर यहीं
रश्मिरथी रची गई यहीं
राधा महा काव्य रची गई यहीं
तू ऐतिहासिक
तू सांस्कृतिक
तू साहित्यिक
तू पारिवारिक
तू राजनीतिक
राजधानी है
तू बलिदानी है
तू खुदीराम बोस की कहानी है
तू प्रफुल्ल चाकी की कहानी है
मैंने यहीं से जीतने की ठानी है
तू क्रांति की कहानी है
जेल से जार्ज फर्नांडीज जीते
वे तेरा दिल जीते
तू उस मंत्री की कहता कहानी है
तू दिल्ली को जोड़े
तू हिंद को जोड़े
तू जग को जोड़े
तू जंक्शन है
तू कंजंक्शन है
तू कनेक्शन है
तू फंक्शन है
तू जोड़ता रिलेशन है
तुमसे मेरा कनेक्शन है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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