सुबह में डांटती
शाम को मानती
कभी मां बनती
कभी बहन बनती
नारी तेरे रुप अनेक
नारी तेरे कर्म अनेक
नारी तुम करती प्यार
तेरी डांट फटकार
में छुपा है प्यार
नारी तुमसे है संसार।
- सहज कुमार
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