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मुजफ्फरपुर नहीं यह लीची पुरम है

                
                                                         
                            गंडक नदी के किनारे
                                                                 
                            
हैं लीची के पेड़ ढेर सारे
दूर से लगता है जैसे बैठे हैं गज ढेर सारे
पास से लगते हैं ये पौधे प्यारे प्यारे
लगता है जैसे स्वर्ग स्वयं उतरा हो धरा पर
लगता है ईश्वर ने बनाया वस्ती यहां पर आकर
या कि स्वर्ग सुंदरी धरा पर आज आई है
मुजफ्फरपुर को सोलहों सिंगार से सजाई है
गंडक नदी लगती बड़ी प्यारी
लगती सारे जग से ये न्यारी
यहां लीची के बड़े बड़े बागान हैं
ये ही तो मुजफ्फरपुर की शान हैं
जिसे जानता जहान है
जिसे पहचाना जहान है
जिसे मानता जहान है
मुजफ्फरपुर नहीं यह लीची पुरम है
स्वाद जिसका अत्यंत मधुरम है
शाही लीची को मानते हम सर्वोत्तम हैं
उसी की मात्रा यहां अधिकतम है
चाईनीज लीची भी मन लुभाए
आप आएं जो चाहें वो खाएं
आकर यहां आप स्वर्ग सुख पाएं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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