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मुखिया चले कार से

                
                                                         
                            आज एक मुखिया कार में चलता है
                                                                 
                            
एक विधायक महंगी कार में चलता है
हमारे दूसरे प्रधानमंत्री का क्या हाल था
जिनका नाम लाल था,जो भारत मां का लाल था
जो नाटा था पर करता कमाल था
पास न एक कार थी,न एक घर था
पर व्यक्ति वह सबसे ताकतवर था
लाहौर तक जमीन जीत लिया
देश से कुछ नहीं लिया
दिल सबका वह जीत लिया
उसके शव का पोस्टमार्टम तक हमनें नहीं किया
जो स्वदेश हित सब कुछ किया
उसको दगा हमनें दिया
गंदी राजनीति ने निगल लिया
ऐसे देश भक्त को हमनें क्या दिया?
ऐसे ईमानदार को किसने धोखा दिया?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 सप्ताह पहले

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