गोरखपुर पुर से काट कर
गंडक नदी के किनारे पर
बसा महाराज गंज शहर
इसके उत्तर में नेपाल है
किया मैंने यहां कमाल है
इसके अगुवा शिब्बन लाल हैं
१९९० से १९९४ तक रहा मैं
यहां दुख सुख सब सहा मैं
जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय में पढ़ा मैं
स्नातकोत्तर हिंदी में कक्षा प्रतिनिधि रहा मैं
यहां स्वामी विवेकानंद कान्वेंट स्कूल खोला मैं
जम कर पढ़ा मैं, पढ़ाया मैं,जम कर बोला मैं
गया विद्यार्थी बन कर
निकला शिक्षक बन कर
रहा यहां मैं तन कर
यह जिला बहुत कुछ मुझे सिखाया
यह मुझे आगे बढ़ाया
नवलपरासी में व्याख्याता बनाया
इसको कैसे भूलूं मैं
मन करता है अंबर को छूं लूं मैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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