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कितना कुछ कर दो

                
                                                         
                            कितना कुछ कर दो
                                                                 
                            
शीष काट कर धर दो
कुछ लोग नहीं खुश होंगे
वे कभी नहीं संतुष्ट होंगे
वे हमेशा ही रुष्ट रहेंगे
क्योंकि काहिल हैं वे
क्योंकि जाहिल हैं वे
वे रखते बहुत बड़ी चाह है
पर वे पकड़ते गलत राह हैं।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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