थम रे बारिश थम जरा
थम रे वर्षा थम जरा
मुझे घर जाना है
मुझे माता पिता से मिलने जाना है
रे पागल बादल,जाने दे मुझे जाना है
कल बरस लेना
कल हरष लेना
तुम्हें बरसता देख किसानों की होती चौड़ी छाती
खेत उनकी थाती,लहराते फसल उनकी थाती
मत करना बेईमानी
करना मत नादानी
कृषकों का तू सहारा
बन तू सबका सहारा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X