स्थाई खुशी सदा हमारे अंदर से आती है
बाहरी वस्तुओं से क्षणिक खुशी आती है
तो भी इंसान है हमेशा से परेशान
कि कैसे बने बिल्डिंग आलिशान
कि कैसे आ जाए खेत खलिहान
कि कैसे आ जाए बड़ा बागान।
- सहज कुमार
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