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कर्म करते जाओ

                
                                                         
                            कर्म करके सब कुछ पाओ
                                                                 
                            
धरा को और सुंदर बनाओ
काम करते करते थक मत जाना
रुक मत जाना
झुक मत जाना
करना कई काम है
काम का बदलना ही आराम है।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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