दो साल से लड़ाई चल रही है
मानवता प्रति पल गल रही है
इंसानियत प्यार के लिए मचल रही है
लड़ाई घृणा से शुरू होती है
सर्वनाश पर समाप्त होती है
कब मानव,मानव बनेगा?
कब इंसान,इंसान बनेगा?
पूछ रहा है कण कण सारे संसार का
क्या होगा मानवता के प्यार का?
- सहज
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