कभी कुछ पाना है
कभी कुछ गंवाना है
ऐसे जीवन बिताना है
पाकर नहीं इतराना है
खोकर नहीं निराशा लाना है
कभी पूर्णता को नहीं पाना है
है जीवन पुष्प सा
है जीवन बाग सा
कलियां आती हैं
कलियां खिल जाती हैं
एक दिन के लिए जग में सौंदर्य बिखराती है
अगले दिन सूख जाती हैं
पर सूखने पर शोक नहीं मनाती हैं
सारे संसार को सुंदर बनाना है
पर हमें नहीं पछताना है
पूरी कोशिश करके जाना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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