आगे बढ़ता जाऊंगा
जीत कर घर आऊंगा
थकेंगे नहीं पांव मेरे
रुकेंगे नहीं पांव मेरे
सर नहीं झुकाऊंगा
तिरंगा नहीं झुकाऊंगा
जीत कर ही आऊंगा
बलिया का नाम
बैरिया का नाम
और आगे ले जाऊंगा
स्वदेश को विकसित बनाऊंगा
जीत कर ही घर मैं आऊंगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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