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जगा हुआ शहर, मुजफ्फरपुर

                
                                                         
                            एक शहर कहता है, "मत जाओ
                                                                 
                            
आ गये तो आकर यहीं बस जाओ"
यह शहर कौन है?
यह शहर नहीं मौन है
यह शहर, मुजफ्फरपुर है
यह जगा हुआ शहर भीखनपुर है
यह मुझसे बतियाता है
यह मुझसे कविता लिखवाता है
गजब का एक उमंग जगाता है
दिनकर जी से रश्मिरथी लिखवाता है
जानकी जी को यही मोह लिया था
उनको पुनः गया जाने नहीं दिया था
मुजफ्फरपुर में मैं जब आता हूं
फिर यहां के प्यार में खो जाता हूं
यहां के लोग प्यारे प्यारे
यहां के पेड़ प्यारे प्यारे
यहां के ताड़ हमें बुलाते हैं
यहां की लीची आम बुलाते हैं
यहां बाबा गरीबनाथ बुलाते हैं
यहां की नदियां हमें बुलाती हैं
बुला कर अपने अंक में सुलाती हैं
यहां नटवर साहित्य परिषद बुलाता है
गांधी पुस्तकालय बुलाता है
निराला निकेतन बुलाता है
कहीं जाओ तो मन कुलबुलाता है
शाही लीची कहती मीठास ले लो
थोड़ा और आस विश्वास ले लो
खुदी राम बोस का शहर कुछ कहता है
प्रफुल्ल चाकी का शहर कुछ कहता है
भाषा इस शहर की कोई कोई समझता है
शहर सस्ता है आम जन के लिए
खान पान सस्ता है गरीब जन के लिए
साग सब्जी फल भरपूर है
अरे! अपना शहर मुजफ्फरपुर है
रश्मिरथी रचे दिनकर
रह कर, दुःख सह कर
यहीं किराए के मकान में
आओ इस शहर महान में
जानकी बल्लभ शास्त्री जी का शहर
बेनीपुरी,राजेन्द्र जी,सहज कुमार का शहर
यही मुजफ्फरपुर है
यहां प्यार भरपूर है
" मुझे बड़ा हवाई अड्डा चाहिए
मुझे एम्स चाहिए"
कहता मुजफ्फरपुर है
मेरे मन में बसता मुजफ्फरपुर है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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