कहीं पके पकवान
कहीं भीख निदान
ईश्वर की अजीब लीला है
कहीं आटा गीला है
कहीं सब कुछ मिला है
कहीं एक नहीं,कहीं हर पुष्प खिला है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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