है इंसान के पास विज्ञान
इसीलिए बनता बलवान
है इंसान के साथ विज्ञान
इसीलिए बनता बड़ा महान
जबकि इंसान है शैतान
कभी बनता बेईमान
कभी दिखाता ईमान
मैं कहता बनो नेक
और तुम बनो एक
तू करता कलुषित कर्म
है नहीं पास तेरे शर्म
कभी तू बनता नरम
कभी तू बनता गरम
है तुम बहुत चालबाज
बनता तू जांबाज
अरे! सुधरो आज
तब बनो बाज
करो कुछ काज नेक
कि बने समाज नेक।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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