पहले हम अभाव में थे नंगे अधनंगे
आज फैशन के प्रभाव में हैं हम नंगे
शौक से लोग घूम रहे नंगे अधनंगे
शौक का ऐसा दौर आया
देखो,सबको नंगा कराया
चलचित्रों ने नंगापन लाया
बेटा सिनेमा देख कर आया
घर में सिगरेट का धुआं उड़ाया
बेटी सिनेमा देख कर आई
माताजी से की लड़ाई
पिताजी से की लड़ाई
प्रेमी से जम के बतियाई
शिक्षकों की खिल्ली उड़ाई
कैसा जमाना आज आया
संस्कृति संस्कार को चबाया
फैशन का कैसा दौर आया?
ऐसे हिंद विकसित देश बनेगा क्या?
ऐसे में संसार स्वदेश से सिखेगा क्या?
हिंदुस्तान हमारा नेताओं के हाथों बिकेगा क्या?
जाओ स्वदेश वालों !संभल
जागो, साहस को बनाओ संबल
दिखाओ अपना अब आत्मबल
हमें अपना अक्साई चिन जीत कर घर लाना है
हमें हमारे हिंद को सबसे शक्तिशाली देश बनाना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह "सहज "
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