स्वर्ग की अप्सराओं से सुंदर
हैं हमारे हिंद के नदी नहर
नाले, नील अंबर
है वासना अप्सराओं के अंदर
पर वासना नहीं है हमारी प्रकृति के अंदर
मन में उठते पावन भाव देख कर
पेड़ पौधे पाहन पठार सुंदर सुंदर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X