बुद्ध को जो ज्ञान दिया
संपूर्ण विश्व में मान दिया
विश्व को जो प्रकाशवान किया
वह शहर हमारा है
वह गया जी हमारा है
जहां पर पर्वत पठार है
जहां जन जन में प्यार है
जहां जन जन का आलोकित अनुहार है
जहां फल्गु नदी की अमृत धार है
जिस शहर पर भगवान विष्णु का उपकार है
जहां ज्ञान धन अपार है
जहां बरसती अमीय की धार है
जहां बहती अध्यात्म की बयार है
जहां नहीं कभी होती हमारी हार है
जहां तिलकुट का भंडार है
और अनरसा भरमार है
जहां आते पिंडदानी हजार के हजार हैं
जहां गूंजता सदा मंत्रोच्चार है
जहां के मिट्टी में प्यार है
जहां की कविता में धार है
जहां घर-घर साहित्यकार हैं
उस गया से मुझे प्यार है
जहां देश प्रेम की ललकार है
जहां चुनौतियां स्वीकार हैं
उस शहर को मेरा नमस्कार है
जहां सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
जानकी बल्लभ की सहज
कविताओं का गूंजता संसार है
उस गया से मुझे प्यार है, प्यार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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