गंगा नदी आती है
नई मिट्टी लाती है
मछलियों को लाती है
वही है घर मेरा,गंगा के किनारे
बहती तेज धारें
लोग होते हैं यहां स्वाभिमानी
लोग होते हैं यहां बलिदानी
गंगा रचती है नित नई कहानी
गंगा के मैदान में पले हैं हम
पैदल खूब चले हैं हम
बागी बलिया वाले हम
क्रांति करने वाले हम
डर का कहीं नाम नहीं
कायरता का कोई काम नहीं।
- सहज कुमार
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