कहां छूट गया गांव मेरा
जहां हुआ मेरे जीवन का सवेरा
वह आम अमरूद जामुन का बागान
जहां था खेल का मैदान
शहर में आकर फंसे हैं हम
यही है बड़ा सा गम।
- सहज कुमार
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