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फल्गु नदी के तट पर, गया शहर

                
                                                         
                            आ रहे हैं पिंडदानी ढेर सारे
                                                                 
                            
शहर में हमारे
बढ़ कर आगे
चढ़ कर आगे
इनका सत्कार करो
इनको प्यार करो
सुनो, टेम्पो वालों!
सुनो,रिक्शा वालों!
सुनो,अटो वालों!
इनको ठगना तेरा काम नहीं
करना शहर को बदनाम नहीं
सुनो, नगर निगम वालों!
सुनो, गया वालों!
शहर में रखना सर सफाई
आ रहे हैं पिंडदानी बहन भाई
हैं ये मेहमान हमारे
करेंगे ये पिंडदान सारे
इनसे अच्छे से बात करो
इनसे मत घात करो
ले जाएंगे ये सुनहरे अनुभव
अपने संग,"बोलो अतिथि देवो भव"
धन्य है यह गया नगरी
धन्य है यह ज्ञान की गगरी
नमवा फैलल बा देख सगरी
पितृ पक्ष मेला में आईए
आईए विश्व वासियों! आईए
गया से अनरसा की मीठास ले जाईए
गया शहर से तिलकुट साथ ले जाईए
हमारे गया शहर के गुण गान गाईए
फल्गु नदी के तट पर आईए
ओ पंडा बाबा!थोड़ा नरमी दिखाइए
हमारे बुद्ध की नगरी की मान बढ़ाइए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक महीने पहले

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