है जिंदगी एक लड़ाई,लड़ लो
है लेना अब अंगड़ाई,अड़ लो
कदम कदम पर मिलती हैं बाधाएं
चलो इनसे हम भीड़ जाएं
हक के लिए लड़ोगे नहीं
हक पर अपने अड़ोगे नहीं
तो हक मिलेगा क्या?
बैठे बैठे पुष्प खिलेगा क्या?
मजबूत मन से
मजबूत तन से
नील गगन से
लड़ो, लड़ कर विजय पाओ
हक पर अपने अड़ कर हक पाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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