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धर्म के ठेकेदार

                
                                                         
                            ईर्ष्या द्वेष लोभ मोह अहं पाखण्ड पालते हैं
                                                                 
                            
पर पूजा करके वे खुद को पवित्र मानते हैं
धर्म के ठेकेदार खुद को भगवान मानते हैं
मंदिरों में इतना दिखावा क्यों है?
मंदिरों में इतना चढ़ावा क्यों है?
भगवान मंदिर मस्जिद में मिलते हैं कहां?
किसान श्रम करते हैं जहां भगवान हैं वहां।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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54 मिनट पहले

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