धर्म के पीछे अधर्म हो रहा है
धर्म कहां सो रहा है?
धर्म कहां खो रहा है?
धर्म के नाम पर
धर्म को बदनाम कर
धर्म के ठेकेदार घर घर घूम रहे हैं
धर्म के ठेकेदार जनता को लुट रहे हैं
धर्म को सत्कर्म से जोड़ो
धर्म को शुद्धता से जोड़ो
धर्म को विज्ञान से जोड़ो
धर्म को कभी न छोड़ो
धर्म मंदिर मस्जिद में नहीं है
धर्म होली ईद में नहीं है
धर्म के ठेकेदार जेल की हवा खा रहे हैं
धर्म के नाम पर हम ठगे जा रहे हैं
धर्म को ढोंग से बाहर निकालो
धर्म की अर्थी मत निकालो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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