स्वर्ग यहीं है
नर्क यहीं है
अवनी यहीं है
अंबर यहीं है
सुख यहीं है
दुःख यहीं है
कर्म करके
धर्म करके
सब कुछ पाओ
धरा को स्वर्ग बनाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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