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धन्य धन्य बा बलिया नगरी

                
                                                         
                            धन्य धन्य बा बलिया नगरी
                                                                 
                            
बसल बा गंगा मईया के कगरी
छलके जहां साहित्य के गगरी
छलके जहां संस्कृति के गगरी
जहां गूंजे सहज कुमार के कजरी
जहां गूंजे बाबा भृगु के मंत्र सगरी
जहां मंगल पांडे के तेज तलवार
के धार पर कट जाए शत्रु के गर्दन बार बार
जहां हजारी प्रसाद द्विवेदी के
परशुराम चतुर्वेदी के
दिखे कलम की धार
जहां हैं सहज कुमार
और उनकी " बागी बलिया"," बलिया की मिट्टी,"के
" वतन के नाम" के अमर रचनाकार
जहां लोग करें साहस से चमत्कार
है वह बागी बलिया हमार
जहां के बगावती तेवर के जाने सारा संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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