देश प्रेम की आग
विश्व प्रेम की आग
तेरे अंदर
मेरे अंदर
निरंतर जलनी चाहिए
निरंतर सुलगनी चाहिए
हर हाथ में विकास की मसाल
हर हाथ में आजादी की मसाल
लिए घर से निकलना चाहिए
पैदल ही सही पर निरंतर चलना चाहिए
आग की ज्वाला बन कर जलना चाहिए
हर समस्या का आज हल निकलना चाहिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X