आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दरवाजे पर आए भगवान

                
                                                         
                            दरवाजे पर कौन है?
                                                                 
                            
क्यों वह मौन है?
दरवाजे को पवन देव ने खटखटाया
हवा है कह कर मैं अंदर आया
हवा ही है भगवान
हूं मैं इससे अनजान
हवा के बिना जिंदा रह सकेगा क्या इंसान?
आग,हवा,पानी, मिट्टी और आसमान
इनसे बना है इंसान
ये ही हैं भगवान।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर