चिड़िया चहचहाई
मेरे दरवाजे पर आई
एक बहार लाई
मंद मंद पवन की एक झोंका लाई
चिड़िया चहचहाई
मन में ताजगी आई
सूरज से बतियाई
खोलो खिड़की देखो तो
कितनी चिड़िया आई?
खोलो किवाड़ देखो तो
कितनी गौरेया आई?
मैं गहन नींद में सो रहा था
सपनों में मैं खो रहा था
तब तक चिड़िया आई
मुझको जगाई
प्रकृति ने अलार्म लगाई
उठो मेरे भाई!
करो कुछ कमाई
वर्षा की बूंदें आईं
पुष्पों को खिलाईं
मौसम ने ली अंगड़ाई
चिड़िया चहचहाई।
- सहज कुमार
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