आपरेशन सिंदूर में,पीओके नहीं ले पाए
तो भी अपनी पीठ अपने थपथपाए
हम नहीं क्यों कायरता करके कायर कहलाए?
वीरता की परिभाषा बदल जाए
असली वीर तो लाल बहादुर कहलाए
जो लाहौर तक तिरंगा फहराए
पर हम कायरता दिखलाए
उनको विष का प्याला पिलाए
पोस्टमार्टम भी नहीं कराए
पूरा शरीर पीला पड़ जाए
पर कुर्सी के लिए कुछ भी कर हम जाएं
झूठे छप्पन इंच का सीना दिखलाए
कुछ कर कहां हम पाए?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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