चाह रहा हूं घर घर में ज्ञान की ज्योति फैला दूं
चाह रहा हूं स्वर्ग को धरा पर ला दूं
चाह रहा हूं धरा को स्वर्ग बना दूं
चाह रहा हूं अवनी और अंबर को मिला दूं
चाह रहा हूं हर हृदय में प्यार पुष्प खिला दूं।
- सहज कुमार
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