कितना भी समझाओ
बार बार समझाओ
बच्चे समझते नहीं
बच्चे बुझते नहीं
नई कलाएं अपनाओ
थोड़ा भय दिखाओ
तो डर कर कुछ पढ़ लेते हैं
थोड़ा और आगे बढ़ लेते हैं
जब तक अंदर आग नहीं
जब तक तप त्याग नहीं
हो सकता विकास नहीं
जब तक अंदर आस नहीं
विश्वास नहीं
तब तक भटकते रहो
और अटकते रहे।
- सहज कुमार
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