भारत मां की जय जयकार बोलो
सबको स्वदेश का प्यार बोलो
लो अटल दृढ़ संकल्प आज
कि करेंगे हम स्वदेश सेवा के काज
चट्टानों से टकराना सीखो
शत्रुओं को हराना सीखो
समंदर में गोता लगाना सीखो
सीखो चलाना हथियार
सीखो बनना ईमानदार
चलो जीतो आज संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X