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भारत मां का आंचल

                
                                                         
                            हिंदुस्तान की सुंदरता को देखा तो देखता रह गया
                                                                 
                            
ये नदी नाले तालाब समंदर पोखर को देखता रह गया
पलकें झपकना भूल गई,मन कहीं खो गया
तन मन दोनों को कुछ हो गया
पेड़ पौधे से सजा संसार हमारे हिंदुस्तान का
पर्वतों पठारों से सजा संसार हमारे हिंदुस्तान का
जादू सा हो गया
दिल कहीं खो गया
भारत मां के आंचल में हैं प्यार
और नदियां हजार के हजार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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3 घंटे पहले

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