ठीक से बोलना जो सीख गया
जंग जिंदगी का वो जीत गया
यहां तो पत्नी ठीक से बोलती नहीं
भारत जैसा देश भला हैं कहीं?
जहां जुबान चलती है कटार जैसी
बात चीत लगती डांट फटकार जैसी
देश अनोखा भारत मेरा
हैं यहां जुबान का फेरा।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X