बेटे के जन्म पर खुशियां हजार
बेटी के जन्म पर दुःख हजार
ऐसा क्यों,जबकि हैं दोनों समान
दोनों से सृष्टि है गतिमान
दो दोनों को सम्मान
दोनों छूएंगे आसमान
बुढ़ापे का सहारा बेटी बने
तो भी बेटी के जन्म पर दुःख क्यों मने?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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