गर्मी जाएगी जरूर
टूटेगा इसका गुरूर
बसंत आएगा
बाग गूंज जाएगा
कोयल के कूक से
पपीहा के हूक से।
- सहज कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X