झम झम बरसा पानी
आई बरखा रानी
पूर्व से पूरवाई आई
मेघों को ले आई
गरज गरज कर
बरस बरस कर
रुक रुक कर
बरसी मेघा रानी
खेतों में पानी
देख मुस्कुराए किसान
रोप रहे हैं धान
मेघमय आसमान
से नई बूंदें आईं
अवनी ने ली अंगड़ाई।
- सहज कुमार
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