है चहुंओर अंधकार
उसमें लेकर शक्ति अपार
मैं बन कर दिनकर आया हूं
साथ में ज्योतिपुंज लाया हूं
बहू बेटियों का करने श्रृंगार
बहू बेटियों का करने सत्कार
आज अभी अभी मैं धरा पर आया हूं
एक क्रांति स्वर साथ में मैं लाया हूं
पावन पवन पावन गंगा सा विचार मैं लाया हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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