जो होता है निडर
जो बोलता वीरता के स्वर
जो छूता सर्वोच्च शिखर
जिसका ऊंचा स्वाभिमान
जो चलता गर्व से सीना तान
तेज जो चलता चाल है
जो युद्ध भूमि में करता कमाल है
जो चरित्रवान हैं
जो मानता संविधान है
जिसका लक्ष्य पर ध्यान है
जिसके रग रग में हिंदुस्तान है
जो छूता आसमान है
जो झुके न कभी
जो रुके न कभी
वह बागी बलिया का वीर है
वह बागी बैरिया का वीर है
वह है बलिदानी
वह है हिंदुस्तानी
उसने जीतने की ठानी
जो हिम्मत से काम ले
जो बुद्धि से काम ले
जो हनुमान का नाम ले
जिसके हृदय में हिंदुस्तान है
जिसके लक्ष्य महान हैं
जिसके साथ भगवती माई हैं
जिसके पास गंगा माई हैं
जिसकी वीरता ही कमाई है
जो आन बान शान
हेतु होता बलिदान
है हिंदुस्तान
का वह जवान
है बागी बलिया का वह जवान
है उसके हाथ में तलवार
है उसे संस्कृति से प्यार
है उसे अपने भारत मां से प्यार
होती उसकी जय जय कार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X