घर वही
आंगन वही
गांव वही
छांव वही बचपना मेरा कहां छूट गया?
उम्र के पड़ाव में कौन लुटेरा मुझे लुट गया?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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